35 साल के अविनाश के के
पास बाकी कुछ हो या नहीं उनके जेब में हर वक्त 8
से 10
गुटखा पाउच जरूर होता है और एक के बाद
एक गुटखा पाउच वह खोलकर लगातार खाते ही रहते हैं,
वह भोजन नहीं मिलने से उतना बैचेन नहीं
होते लेकिन गुटखा नहीं मिलने से वह बेचैन हो जाते हैं। गुटखा खाने से मुंह में
कैंसर हो सकता है और यह बात कई गुटखा खाने वालों को पता हो या नहीं पर अविनाश को
यह बात अच्छी तरह से पता है, वह पोस्टरों में भी देख चुका है और उन लोगों से भी मिल चुका है
जिनके गाल और जबडे में घाव होने के साथ साथ कष्ट झेल रहे थे, पर, इन सब के बावजूद जब
उससे पूछा जाता है कि वह सब जानते हुए भी गुटखा का इस्तेमाल क्यों करा है? तो बातों को हवा में
उडाते हुए कहता है कि अरे कुछ नहीं होगा,
और होगा तो देखा जाएगा। अविनाश एक
सामाजिक कार्यकत्र्ता हैं, जो
अपना काम-धंधा छोड दूसरों की सेवा में लगे रहते हैं,
जब उनसे गंभीरता से पूछा गया तो उसका
उत्तर था कि छोडना तो मैं भी चाहता हूं पर ऐसी कई कोशिशों के बावजूद कर नहीं पाया
हूं। अब यह आदत पड गई है जिससे छुटकारा मिलना फिलहाल मुश्किल लगता है।
रायपुर का 9 वर्षीय सलमान दिनभर कूडेदानों में घूम-घूम क पाॅलीथीन बीनता है
और मुश्किल से 30 रूपये
से 80 रूपये
का कूडा बेचकर कमा लेता है पर, दिनभर में वह 10
से 15
रूपये ाक गुटखा खा जाता है। पूछने पर वह
कहता है कि सब तो गुटखा खाते हैं और हमारे बडे भाई लोग कहते है, गुटखा खाओ, बिंदास रहो, इससे साफ है कि गुटखा
अब बच्चों के भी दिलो दिमाग में — कर गया है और सलमान अकेला नहीं है उसके जैसे सैकडों बच्चे आज
गुटखा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनके दिमाग से इसे निकालना इतना आसान नहीं है। गुटखा अब शहर
से लेकर गांव तक, गली-मुहल्लों
से लेकर शहर में कही भी उपलब्ध है- रंग बिरंगी आकर्षक पाउच में।
गुटखा क्या है?
गुटखा एक बहुत ही घातक चबाने और चूसने
वाला सिचर है , जिसे
गुटखा या गुटका भी कहा जा रहा है। यह तकरीबन 1975
से इस तरह से पाउच और पैकेट में मिल रहा
है पर लगता है अब पिछले कुछ सालों से यह ज्यादा फैल चुका है। इसके बारे में धमतरी
के रंजना ठाकुर का कहना है कि इसके दो वजह हो सकते है, एक तो सिगरेट का
सार्वजनिक स्थानों में वर्जित होने से लोग गुटखा को उसका तात्कालिक विकल्प के रूप
में अपना रहे हैं क्योंकि सिगरेट के समान यह भी एक तंबाकू प्रोडक्ट है, इसका सबसे ज्यादा
प्रतिकूल असर हमारे स्वास्थ्य पर हो रहा है। इसे इस्तेमाल करने वाले बच्चों और
युवाओं के मुंह के कैंसर के पूर्व बहुत पीडादायक अवस्था जिसे अंगे्रजी में ओरल
सवम्युकोस फिब्रोसिस ;वतंस
ेनइउनबवने पिइतवेपेद्ध कहा जाता है,
पाया जा रहा है। यह आदत बहुत ही कार्सिनोजेनिक
है क्योंकि इसमें सुपारी और तंबाकू दोनों शामिल हैं। गुटका, धूम्रपान का पहला
पडाव भी हो सकता है।
गुटखा का कॅम्पोजिशन
गुटखा का कॅम्पोजिशन
इसमें सुखा सुपारी तंबाकू ,
खैर ;बंसबपनउ ीलकतवगपकमद्ध,
निंबू और सुगंधित बनाने के लिए दूसरें
चीजों का इस्तेमाल होता है, इसे
सुगंधित और स्वादिष्ट बनाने के लिए और कई मसाला और रसायन का उपयोग किया जाता है
जैसे खुशबुदार चंदन लकडी की सुगंध,
और सुगंध की वजह से चिढ या खीज को दूर
करने के लिए मेंथोल और यूरोनोल शामिल किया जाता है साथ ही स्वादिष्ट करने के लिए
चीनी या मीठा करने वाले पदार्थ, उसके अलावा एनी चीजें जैसे स्वाद विलायक ट्र्ायसेटिन ;जतपंबमजपदद्धए
ग्लिसरल ;ीनउमबजंदजेद्ध
साथ ही कवक विरोधी खाद्य परिरक्षकों ;ेवकपनउ चतवचतपवदंजमद्ध साथ ही कई दूसरे रसायन जैसे अमोनिया, कैल्सियम और
मैगनेसियम कार्बोनेटेस शामिल है।
एक नजर आंकडों पर
ळल्ज्ै.इंडिया के अध्ययन के मुताबिक भारत में महाराष्ट्र् और
पंजाब जैसे राज्यों में इसका इस्तेमाल 15
से 66
प्रतिशत है, इसकी वजह से युवा कम
उम्र में बीमारी और मौत के शिकार होने लगे हैं,
जिसे रोकने के लिए कडे कदम उठाने की
आवश्यकता है। स्वस्थ और सुंदर दुनिया के लिए तंबाकू को रोकना जरूरी है क्योंकि
तंबाकू से दुनिया भर की अर्थ व्यवस्था को 500
अरब डालर की चपत लगती है और यह
स्वास्थ्य पर निम्न व मध्यम आय वाले देशों के कुल वार्षिक खर्च से ज्यादा है,
Caption: हम नहीं बल्कि गुटखा
हमें चबा रहा है कच्चा
Language: Hindi
Release Date: NA
Fellowship Year: 2009-10
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